~"नीलोत्पल मृणाल द्वारा रचित"~ जुग जुग जिए तू राजा, भारत को तार दे। भारत की नैया , भले नदी टेम्स में उतार दे... हमे क्या? रोजगार दे रे झुट्ठा... रोजगार दे।। युवाओं के हाथ मे , चाहे मराठी तलवार दे। हैदराबादी निजामों की गर्दनें उतार दे..... हमे क्या? रोजगार दे रे झुट्ठा.... रोजगार दे।। चल तू होगा भागीरथ, नयी गंगा बौछार दे। साफ कर दे यमुना रविशंकर सा संवार दे.... हमे क्या? रोजगार दे रे झुट्ठा...रोजगार दे।। भारत का मान बढ़ा, दुश्मन को मार दे। करांची में घुस के मुल्लों को फाड़ दे.... हमे क्या? रोजगार दे रे झुट्ठा...रोजगार दे।। हर दीवार भगवा कर दे, धोती नारंगी पसार दे। बाकि रंग धो डाल अपना रंग ढार दे..... हमे क्या? रोजगार दे रे झुट्ठा... रोजगार दे।। तू ही हिन्द का रखवाला, चंद्रगुप्त सा वार दे। तू ही वशिष्ठ तू ही अगस्त्य जी भर के सबको ज्ञान दे..... हमे क्या? रोजगार दे रे झुट्ठा....रोजगार दे।। अब हिन्द में हिन्दू तुझसे ही है, अपनी रहमत की ढाल दे। तू नही रहा तो कैसे बचेंगे ये हल भी निकाल दे.... हमे क्या? रोजगार दे रे झुट्ठा...रोजगार दे।।...